दोराहे पर खड़ा हूँ…

मंजिलों का चक्रव्यूह…
खोए से रास्ते…
कदमो में बेड़िया हैं …
थक चूका हूँ मैं
थक चुके हैं सब !!!
सूखी हुई आँखें…
तनहाइयों का शोर…
टूटे हुए ख्वाब…
गम सी धडकनें हैं …
थक चूका हूँ मैं
थक चुके हैं सब !!!

 

 

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