दुविधा

जाने ये सड़क का मोड़
किस और ले जाएगा
मंज़िल को तलाशते
ये वक़्त भी निकल जाएगा
अंजाने सफ़र के हम हैं राही
इस दुविधा की है दुविधा बड़ी

जब ठोकर लगी थी हमें
तो उस पत्थर को
नहीं देख पाए थे हम
दोराहे पर आज फिर
दिख रहा है एक पत्थर
पहचान छुपी है उसकी
इस दुविधा की है दुविधा बड़ी

एक दबी सी प्यास है
अंजना अहसास पास है
बस साँसों की तलाश है
धड़कन की एक कड़ी गुम सी है
इस दुविधा की है दुविधा बड़ी

कुछ आ रहा है नज़र
पर कुछ रहा है बिखर
अंत के करीब हैं
या करीब अभी दूर है
इस दुविधा की है दुविधा बड़ी

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