tears

 

बहुत दिनों से मैं रोया नहीं

एक उथल-पुथल है
मेरे जहन में
एक कशमकश है
मेरे मन में
गुबार के बादल
आँखों में
काले हुए जा रहे हैं
डर है सूख ना जाए कहीं
बहुत दिनों से मैं रोया नहीं…

दर्द है
प्यास है
बेचैनी है
तड़प है
अहसास गुम ना हो जाए कहीं
बहुत दिनों से मैं रोया नहीं…

अपनो से दूर
रिश्तों की कड़वाहट
उम्मीदों की आस
भीड़ में होती है तन्हाई
खुद से ना बिछड़ जायें कहीं
बहुत दिनों से मैं रोया नहीं…

छटपटाहट
बोझिल साँसें
काँपते होठ
कहराती खामोशी
सन्नाटे सा शोर
इस अंधेरे को जाने दो
आज मुझे रोने दो…

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