जाम में ज़िंदगी
ज़िंदगी में जाम

सुबह-शाम जाम
सरे-आम जाम

खिसकता शहर
खिसकती जिंदगानी,
उड़ता धुआँ
बोझिल बेचैनी…

काँपती साँसें
आँखों में प्यास,
डूबता सूरज
मन में आस…

एक तरफ है रफ़्तार
जा रहे सपनो के पार,
ठिठक जाते हैं कदम
खामोशी से आती पुकार…

ढूँढते चेहरे
पढ़ते चेहरे
थके हुए चेहरे
प्यारे से चेहरे
सब
जाम से हारे

एक जाम
जो भुला दे गम,
एक यह जाम
जिससे त्रस्त है जीवन…

DREAMS & TRAFFIC jAMS
DREAMS & TRAFFIC jAMS
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