आज आज है
और कल बीत गया…
रोज़ कुछ नया होना
यही है जीना…

रिश्ते रोज़ बनते हैं
नये चेहरे मिलते हैं
खुली आँखों में  सपना
यही है जीना…

फूल रोज़ खिलते हैं
 नये भवरे मिलते हैं
मुक्त आकाश  पंछी का उड़ना
यही है जीना…

चाँदनी रात की ओस
रोज़ टूटते तारे
घना अंधेरा होना
यही है जीना…

हवा में ज़ुल्फो का उड़ना
आहट से दिल का धड़कना
छिपी हँसी का आना
यही है जीना….!


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