zindagi tujhse naraaaz nahin…. bassss hairan hooon !!!

समय मैं उनका हुआ करता था 

हर पत्थर को ठोकर मारता था

 असन्ख्य चोट लगी थीं दिल पर 

सब चल रहा था हंसहंसकर 

फिर मैंउनसे अलग हो गया 

और उनके गम में शामिल हो गया ...

 

 

जब नाता टूटा था  

दिल पर बोझ लगता था 

हम सोचते थे की वो अकेले रह गये

 पर कुछ ही पल में उनको और मिल गये 

और हम अकेले रह गये  

 और उनके गम में शामिल हो गये ...

 

धीरेधीरे उनके सब अपने छूट गये 

गैरों को वो अपना कहने लगे 

और फिर ज़मीन परउड़ने लगे 

आत्म सम्मान उनका जाने लगा  

 

 और उनके गम में शामिल हो गया ... 

 

 

तारों की थी आदत उन्हे

अब हाथ पर छाले पड़ने लगे

 जो खुदा के थे आँखों के तारे 

वो ही अब खुदा को अखरने लगे 

और उनके गम में शामिल हो गया ..

 

शायद यह उन्हे महसूस होगा  

की वक़्त हमेशा एक सा नहीं रहता

 वो ही रहते हैं...जो अपने होते हैं

सोच से दूर रहकर भी 

मन से दूर नहीं होते 

फिर मैं उनके पास आ गया

और उनके गम में शामिल हो गया… 
 
 

 

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